- इतिहास के पन्नों से रिसता लहू: क्या हम भूल गए?
इतिहास केवल तारीखों का खेल नहीं है, वह हमारे अपनों के बलिदान की गाथा है जिसे ‘सेकुलर’ इतिहासकारों ने हमसे छिपाया।
नलंदा का दहन: याद करो, जब बख्तियार खिलजी ने हमारी ज्ञान की धरोहर नालंदा को जलाया था। महीनों तक हमारी पवित्र पांडुलिपियाँ जलती रहीं, हमारा ज्ञान राख होता रहा, और हम देखते रहे।
गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादे: उन मासूमों को याद करो जिन्हें दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया क्योंकि उन्होंने धर्म छोड़ने से इनकार कर दिया था। क्या उनका बलिदान ‘सेकुलरिज्म’ के लिए था? नहीं! वह ‘हिंदू धर्म’ की आन-बान-शान के लिए था।
संभाजी महाराज की वीरगति: औरंगजेब ने 40 दिनों तक उनके शरीर के अंग काटे, उनकी आँखें निकाल लीं, उनकी खाल खिंचवा दी—सिर्फ इसलिए कि वे झुकने को तैयार नहीं थे। आज हम उन्हीं की संतान होकर उन आतताइयों के नाम पर बनी सड़कों पर शान से चलते हैं? यह शर्मनाक है!
- ‘हिंदू विहीन‘ भारत की भयावह तस्वीर
जहाँ-जहाँ हिंदू घटा, वहाँ-वहाँ भारत कटा और वहाँ-वहाँ इंसानियत का कत्ल हुआ।
नोआखली (1946): विभाजन से पहले बंगाल में हिंदुओं का जो नरसंहार हुआ, वह रूह कंपा देने वाला था। हजारों औरतों को जबरन निकाह के लिए मजबूर किया गया।
मोपला (केरल): ‘खिलाफत’ के नाम पर हजारों हिंदुओं को काटकर कुओं में फेंक दिया गया। आज फिर केरल उसी रास्ते पर है, जहाँ ‘लव जिहाद’ के कारखाने चल रहे हैं।
कश्मीर की चीखें: 1990 में जब घाटी के मंदिरों से ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के साथ नारे लग रहे थे कि “हिंदू पुरुषों यहाँ से भाग जाओ, अपनी औरतों को यहीं छोड़ जाओ,” तब दिल्ली का शासन अंधा और बहरा बना बैठा था। क्या आप चाहते हैं कि कल यही मंजर आपके शहर, आपकी गली और आपके घर के बाहर हो?
- आधुनिक जिहाद के नए चेहरे: वक्फ, लैंड और डेमोग्राफी
दुश्मन ने युद्ध का तरीका बदल लिया है, अब वह सीधे नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर से हमला कर रहा है।
वक्फ बोर्ड का दानव: एक ऐसा कानून जिसके पास असीमित शक्तियाँ हैं। वह आपकी पुश्तैनी खेती, आपके पुरखों का घर और यहाँ तक कि आपके मंदिर को अपनी संपत्ति घोषित कर सकता है। और सबसे बड़ा मजाक? आप इसके खिलाफ साधारण कोर्ट में अपील तक नहीं कर सकते। यह ‘हिंदू राष्ट्र’ नहीं तो क्या ‘इस्लामिक स्टेट’ की तैयारी है?
हलाल इकोनॉमी: आपके हर सामान पर ‘हलाल’ की मुहर लगाकर आपसे पैसा वसूला जा रहा है, और उस पैसे का उपयोग उस तंत्र को पालने में हो रहा है जो आपके अस्तित्व के विरुद्ध है।
अवैध घुसपैठ (रोहिंग्या और बांग्लादेशी): ये दीमक की तरह आपके राशन, आपकी जमीन और आपकी सुरक्षा को चाट रहे हैं। ये केवल शरणार्थी नहीं, ये ‘वोट बैंक’ के वो हथियार हैं जो एक दिन आपको अपने ही घर में बेगाना कर देंगे।
- ‘धर्मनिरपेक्ष‘ हिंदुओं की नपुंसकता पर अंतिम प्रहार
ओ गंगा-जमुनी तहजीब का ढोंग करने वाले हिंदुओं! तुम जिसे अपना ‘भाईचारा’ समझते हो, वह उनके लिए केवल एक ‘रणनीति’ (Taqiyya) है। जब वे सत्ता में होते हैं, तो ‘शरिया’ मांगते हैं, और जब विपक्ष में होते हैं, तो ‘संविधान’ का रोना रोते हैं।
तुम दिवाली पर पटाखे फोड़ने से डरते हो, लेकिन वे सड़कों पर नमाज पढ़कर अपनी ताकत दिखाते हैं।
तुम अपनी जाति में बँटकर एक-दूसरे की टांग खींचते हो, और वे अपने ‘मजहब’ के लिए एक इशारे पर एकजुट हो जाते हैं।
याद रखना: जिस दिन तुम अल्पसंख्यक हुए, उस दिन तुम्हारा यह ‘सेकुलरिज्म’ का झुनझुना सबसे पहले कूड़ेदान में फेंका जाएगा। तब न कोई मानवाधिकार आयोग आएगा, न कोई कैंडल मार्च निकलेगा। तब सिर्फ सन्नाटा होगा और तुम्हारा अंत।
- संकल्प: अब या कभी नहीं (The Final Stand)
अब समय आ गया है कि हिंदू अपनी रक्षा के लिए खुद खड़ा हो। हमें किसी मसीहा का इंतजार नहीं करना, हमें खुद ‘काल’ बनना होगा।
आर्थिक पूर्ण बहिष्कार: जो विचारधारा हमें मिटाना चाहती है, उसे एक रुपया भी देना पाप है।
एकता का वज्र: जातिवाद के जहर को थूको। चाहे दलित हो, पिछड़ा हो या सवर्ण—जब तक तुम ‘हिंदू’ नहीं बनोगे, तुम काट दिए जाओगे।
हिंदू राष्ट्र का निर्माण: हमें वह भारत चाहिए जहाँ संसद में ‘वन्दे मातरम’ अनिवार्य हो, जहाँ हमारी संस्कृति का अपमान करने वाले की जगह जेल में हो, और जहाँ हर कानून ‘धर्म’ (Dharma) पर आधारित हो।

Deepak G –
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